लगता नहीं है कि फिर उनसे मुलाकात होगी
अगर हो गई तो मेरे लिए बड़ी बात होगी।
मोतियों की तरह पिरों कर रखा है शिकायतों को
सामने उनके ही हर जबाव सवालात होगी।
निगाहों को ही करना पड़ेगा ब्यान-ए-दास्तां
वहां चुप रहेंगी जुबां मगर बात होगी।
मेरे दिल में है जो जज़्बात का ये बड़ा पत्थर
यकिनन टुट कर उस दिन तार-तार होगी।
सवालों की लड़ियां बढ़ती जा रही है हर रोज़
जिंदगी मेंं कमबख्त कब हंसीन रात होगी।
अनुराग आ जाओ गले मिल के रो ले हम तुम
खुदा जाने फिर कब हमारी मुलाकात होगी।
©anuragrahi
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