लगता नहीं कि इस मकान में अब कुछ है
बेकार हों जाएगा प्रयास तेरे दिमाग़ में जो कुछ है।
है ग़लत खुद पर इतना गुमान करना
मेरे लिए तेरे सिवा इस जहान में और कुछ है।
तुम्हें नहीं चलना गर संग बेशक साथ न दो
मंजिल है सामने आ पड़ी बस दुर और कुछ है।
कुछ अजब-गजब हों रहा है इन दिनों मेरे साथ
दिखता कुछ है और ध्यान में कुछ है।
मेरा दिल भी अब तेरा ही है ढंग सिख लिया
मेरे आन में कुछ है और ईमान में कुछ है।
आता नहीं अनुराग को बनाने बहाना जियादा
मिलना है तो मिल लो ये जीवन बचा शेष कुछ है।
©anuragrahi
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