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" लिखी किताब "

अपनी लिखी किताब के पन्नों की निष्पक्ष जांच करना..
अपने पुराने पन्नों का फिर से दीदार करना...
उन घटनाओं को गहराई से याद करना....
उस वक्त के दरिया में डुबकी लगाकर खुद को गीलेपन से तार करना...
धीरे से अपने पन्नों को समेट कर किताब को अपनी तुम बंद करना....
मन के सुनहरे संदूक में उनकी तुम हिफाजत करना...
याद कर उन पन्नों को अभी के पन्नों में थोड़ा थोड़ा सुधार करना....
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