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लिखना भी क्या लिखना है सोच समझ कर लिखना

लिखना भी क्या लिखना है सोच समझ के लिखना हैं
जज्बात की कलम हक ए अधिकार तुमको लिखना है
गुलामी की जंजीर तोड़ कर तुमको आजादी लिखना है
सर्दियों की जंजीर तोड़कर आगे बढ़ना मुझे लिखना है
आज अगर तुमने ना लिखा तो इतिहास गवाह होगा
गुलामी की जंजीर को तोड़कर को आगे लिखना है
अपने मौलिक अधिकारों को तुमको उनको लेना होगा
कसम तुम्हारे संविधान की तुमको अधिकार लेना होगा
जंग तुम्हारी यह मौलिक अपने अधिकारों को लेना होगा
आडंबर पाखंडवाद तुमको जनजागृति मशाल जलाने
©lawnishtha