मत छीनो मुझसे मेरी कलम
मुझे लिखने दो मुझे लिखने दो
मत मारो मेरी जिज्ञासा को
मुझे जीने दो मुझे जीने दो
मत फेकों जहर मुझपे
मुझे औषधि बनने दो
मै शांति से जीना चाहती हूं
मुझे विवश मत करो मत करो
मै लड़ना नहीं चाहती तुम सबसे
जो खुद के विचारों से खुद में लड़ रही हो
वो तुम सबसे नहीं लड़ पाएगी
अब उसमें इतनी हिम्मत कहां
मत उक्साओ अब उसको
उसे जीने उसे जीने दो.....
©anusingh
A