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लिखूँगी

♥️ना शिकायत, ना गुस्सा , ना तकरार लिखूंगी
सोच रही हुँ की अब बस प्यार लिखूंगी..!
♥️परत-दर-परत खुल गए तूफ़ान मन के सभी
की अब बारिश की ठंडी सी फुहार लिखूंगी..!
♥️गलतियाँ, सीख, सबक आखिर कब तक लिखूं
अपनी जीत का जशन और विजय का गान लिखूँगी..!
♥️अतीत की मजबूरियाँ ना बनेंगी बेडियाँ आज की
मै खुले आस्माँ मे खवाहिशों का परवाज़ लिखूंगी.!

♥️टूटे विश्वास के उलाहने क्यूँ रखे मन मे संभाल कर
इस खुबसूरत जिन्दगी पर अपना ऐतबार लिखूंगी!
♥️वो तगाफुल, वो झूठ सौंप दिया था जिनका भी
खुद को अपने एहसासों और खुशियों का अमानतदर लिखूंगी ..!
©riyajangra