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लिपटे ख्वाब में रहना अंदाज पुराना है।

लिपटे ख्वाब में रहना अंदाज पुराना है
बस ब्यां करो ये दिल ये नया जमाना है।
नाजुक निगाहों में मुहब्बत भी नाजुक है
आज हम है और कल कोई बेगाना है।
क्या हमनें समझा और क्या वो है समझी
बाकी कुछ हमें सुनना है कुछ उसे सुनाना है।
वो जमाल-ए-हुस्न उनका ये शबाब-ए-इश्क़ अपना
किसी रोज़ तो इन्हें उमड़ ही आना है।
आज आप खफ़ा हैं और कल मैं खफ़ा था
इजाफा-ए-प्यार में खुबसुरत बहाना हैं।
हां है ये इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा अनुराग का
तुम्हें सितमगर आज हँस हँस के रूलाना है।
©anuragrahi