सफर में आते जाते, मिले अजनबी कितने
नजर आए पर, पल में गुम हो गए
पाणी पे खिचीं लकीर जैसे
कुछ लोग बेहद पास रहकर यूं बिछडे
धीरे धीरे मिटते गए, सारे जहन से
रेत पे खिचीं लकीर जैसे
तुम पहले शक्स ऐसे आए
निगहों से यूं दिल में समाए
अब सदिया बीत जाएगी पर
मिट ना पाओगे दिल की गहराइयों से
पत्थर पे खिचीं लकीर जैसे
@sakhisarthi
©sakhisathi
S