तेरे साथ गुजारे
कुछ लम्हें बडे प्यारे
कुछ सरगोशियां
कुछ खामोशियां
हर एक लम्हा समेटे हुए
एक दूसरे के प्यार को
एक दूसरे के संसार को
फिर शक की आंधी एक आई
पल में लम्हों ने की जुदाई
जो संग संग कभी थे
अब हो ग्ए सैदाई
वो बातों की झडी
वो प्यार के खेल पुराने
झूठे लगने लगे हैं
तेरे मेरे वो सारे अफसाने
लम्हों ने की खता है
लम्हों ने दी सजा है
लम्हों ने मिलाया था
लम्हों ने किया जुदा है
हो जाती है एक गलती
दुनियां नहीं समझती
बिगड जाता है खेल सारा
रह न जाता कुछ हमारा
लम्हों को सहेजना सीखो
प्यार को परखना सीखो
भूल हो जाए कभी किसी मुकाम पर तो
हंसकर अपनी भूलों से सीखना सीखो
इंसान हो तुम नहीं हो फरिश्ता
संभालकर रखना पडता है रिश्ता
©selfmade
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