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लम्हें गुजारे साथ मगर मुझे समझ कर नहीं देखा।

लम्हें गुजारे साथ मगर मुझे समझ कर नहीं देखा
मैं आइना हूं मगर सामने संवर कर नहीं देखा।
सुरज की रोशनी पड़ती हैं सब के बदन पर
मेरी तरह धुप किसी ने सह कर नहीं देखा।
बेवक्त बेवजह कुछ कहने की मुझे आदत नहीं
इसलिए शायद उसने मुझे पलट कर नहीं देखा।
आंखों ने इशारों में समझाने की कोशिश बहुत की
चेहरे की खुशी देखी दिल का गम नहीं देखा।
जिस दिन से मिला हूं इक उफान सी है दिल में
मगर इस लहर ने कभी किनारा नहीं देखा।
पत्थर समझते हैं अनुराग को चाहने वाले
वो मोम हैं किसी ने पिघला कर नहीं देखा।
©anuragrahi