लोग कहते हैं कि मैं दिलेरी बन गया हूँ
मैं खुद में ही एक पहेली बन गया हूँ।
हालात ने मुझे इस कदर है झकझोर दिया
अभी तो मैं वक्त का रखेली बन गया हूं।
कभी ज़ाम थे हाथ जोश मन में और मर्दानगी भी
अब तो ऐसे जैसे किन्नरों की सहेली बन गया हूँ।
मैं इतिहास का वो इक खोया कोरा पन्ना हूं
जिसपे लिख दो कुछ भी एकदम नई नवेली बन गया हूँ।
कोई दिल मुझमें कैसे बसर कर पाएगा
मैं तो ग़मों का अब हवेली बन गया हूँ।
©anuragrahi
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