कहां गईलू हो छोड़ के जिनिगीया के मेल
कहाँ गईलू हो तोड़ के उमरिया के खेल ।-२
हरदम कहत रहूं हम तोरे साथ रहम
कसम सात फेरवन के हम तोरे पास रहम
हो कैसे बुझ गईल-2 हमर डिबिया के टेम ।
कहाँ गईलू......................... के मेल
अंखियां के निंदिया बस तोहरे गुलाम बा
कैसे कहूँ जिअल हमर बहुत बेहाल बा
का होई कोठवा आउर-२ बैंकवा बैलेंस
कहाँ गईलू............................ के मेल
अगले जनमीया में जब पियरी लगईह
हमरे ही नामवा के बस मेंहदी सजईह
बाके अनुराग के अब-२ ईहो दिल के संदेश
कहाँ गईलू हो छोड़ के जिनिगीया के मेल
कहाँ गईलू हो तोड़ के उमरिया के खेल ।
©anuragrahi
S