दिल तड़प उठा अक्सर मोहब्बत निभाते निभाते,
अजीब लगता है अब उसे फोन लगते हुए !!
इक वक्त था ,जब रो लिया करते थे दिल खोलके,
अब तो गला भर आता है आंसू छिपाते हुए !!
जाने कितने ही वादे किए थे उसने अक्सर,
हां , वही देर रात मेसेज से जगाते हुए !!
याद है उसका कहा कि ' बिछड़े तो मर जाएंगे,'
उसने इक आंसू भी न बहाया हाथ छुड़ाते हुए !!
ये दिल अब पत्थर सा हो गया ऐसे हालात में,
इक उम्र फिर लगेगी दिल को दिल बनाते हुए !!
इतना आसान कहा होता है भूल पाना सब कुछ,
कई रातें लगती हैं यादों का शहर जलाते हुए !!
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©kajal_01
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