लस्सी मख्खी मारती, पेप्सी की है धूम ।
कुल्लड़ के दिन लद गए,अब बोतल को चूम ।
अब बोतल को चूम , चढा गर्मी का पारा ।
बोतल पकड़े हाथ , घूमती दत्ता लारा ।
मुन्ना” नाक सिकोड़,कह रही मैडम जस्सी।
पेप्सी देना एक,उठा ले जा यह लस्सी ।।
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©vikasgarg
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