सोचकर गर मैं तुझे कुछ लिखूं
तू इतनी खूबसूरत हो जाती हो ...
भूल संसार मैं तुझ में खो जाती हूं
और कुछ लिख भी ना पाती हुँ।।
इस शोरगुल से भरी दुनिया में
एक चहक तराशती हुँ।
हर समंदर के किनारे पर बस
तुझे ही तलाशती हूँ।।
मां तुम मेरी आदत में शुमार हो
मेरे मन की बयार हो।।
तुझसे अर्जित मेरा सामर्थ्य है
तुझसे ही सृजित तो मेरा हर पथ है।।
मेरी हर टुटती आशा पर
सूरज की किरण तू लहरा देती है ।
बन छाया मेरे धुपों की
तू मेरी छतरी बन रहती है ।।
सूरज की तपती धूपों से
बदली बन तू मुझ को ढक लेती है ।।
मेरे ख्वाबों को अपना ख्वाब बना
जो तू रातों को जागा करती है।
नैनों में अपने लिए हरदम सवेरा
माथे को मेरे तू सहलाया करती है ।।
मां तू बता किस अर्श पर
तेरी कहानी लिखूं...।
तेरे अश्कों का किस्सा कैसे
इस जुबानी लिखूं।।
ये चांद चुरा जाता तेरी चांदनी है
बिनिशां तेरी तड़प की कहानी है।।
फिर भी तुम हंसती रहती हो
मां तुम मेरी कमाल करती हो ।।
अश्कों में अपने दर्द छुपा
लिए किरण भरोसा की
हमसे आकर कहती हो
रखना विश्वास धरा के अंतिम छोर तक
रोशनी की खोज में कभी
तो कम अंधकार होगा ..।
होना ना भ्रमित अपनी दिशा में
एक दिन तेरा भी पथ साकार होगा।।
इस नव कंठ से निकली
हर ध्वनि तुम्हारी है ।।
तुम ही परब्रह्म हो
तुम ही परिधि हो मेरे जीवन की ।
तुम एक विकल सा आंचल हो मां
सृजनी तुम हो समिधा और
शक्ति भी तुम हो ।।
मेरे संपूर्ण जीवन की कुंजी तुम.हो।।
Happy mother's day Maa
©monasingh
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