मालूम है ये साल मेरी है आखरी।
ऐ जिन्दगी कहीं और चल
जहां कोई तेरा सगा न हो
अब किसे कहें यहां अपना
कौन है जो हमें ठगा न हो
क्या समझेंगे वो असल मायने
ठेस जिंदगी में जिसे लगा न हो
आनी है तो फ़कत मौत आए
मेरे साथ फिर कोई दगा न हो
मालूम है ये साल मेरी है आखरी
मेरे बाद मेरे लिए रतजगा न हो।