श्वास की गहराई में जिनका ही आभास है
तन्हाई की तरकस में जिनका ही साथ है
शब्दों की वफाई में जिनका ही प्रकाश है
नैनों की नैय्या में फैला जिनका पाश है
जिनके स्वरों की सरगम मे मन भी दास है
समय के भंवर से परे जिनका अद्भुत आकाश है
जिनकी गोद में सिर रखना हमारी दिनचर्या में खास है
नम आंखें लिए उपस्थित हो जाने का कर्म ,
हमारे हृदय के सबसे पास है
उनके लिए शब्द क्या लिखें
जिनकी आभास से ही बहती हमारी श्वास है ,
और सांसो की माला में सिमटा जीवन ,
उनके ही चरणों का दास है
उनके ही चरणों का दास है।।
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