V

मां

घर को पूरा जीवन देकर बेचारी मां क्‍या पाती है
रूखा सूखा खा लेती है पानी पीकर सो जाती है
जो मां जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं
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©vikasgarg