कहां गिरे कैसे गिरे,ये रूह जख्मी हुई कब
मत पूछो अ यारों तुम मेरे रोने का सबब
करते नही बड़ों को झुक कर सलाम अब तो
भूल गया नया दौर वो पुराने सलीके के अदब
मत ले जालिम तू अपने घर जाने का नाम
इधर तू उठेगी उधर हो जायेगा बड़ा गजब
नजर आता है हर और सिर्फ वतन ही वतन
मैं तिरंगे को दिल की नजरों से देखता हूं जब
खुदा का नम्बर भी आता है बाद इनके लबों पर
माँ बाप से तो बहुत ज्यादा छोटा होता है रब
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©vikasgarg
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