सिर्फ एक शब्द होता है माँ,
एक नया जीवन देती है माँ,
अपने रक्त का दूध बनाती है माँ,
बालक को सीने से लगाती है माँ,
उंगली पकड़कर चलना सिखाती है माँ,
गूंगे को बोलना सिखाती है माँ,
लोरी का संगीत सुनाती है माँ,
जीवन की राह दिखाती है माँ,
बच्चे को बिस्तर पर सुला कर खुद जमीन पर सोती है माँ,
ठंडी हवा के झोंके से बचाती है माँ,
आग की तपिश खुद सहन करती है माँ,
शब्द माँ के सामने हर एक शब्द निशब्द है,
भगवान भी जिसके आगे झुक जाते हैं वह है माँ,
गुरु भी जिसके बिना गति न पाते वह है माँ,
अब क्या कहूं माँ माँ माँ और सिर्फ माँ..
विकास गर्ग
©vicky
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