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☀️माँ गंगा ☀️

जिनके स्मरण से ही हृदय में सुकून सा भर जाता है जिनका आभास अनुभूतियों की आनंदमय वर्षा कर जाता है
और क्षण भर में उनके आंचल की छांव से हृदयगत हर कोना तर जाता है
उनके किनारे पर बैठा हमारा तन आंखों के समक्ष अपना अस्तित्व प्रकट कर जाता है
उनके बहने की शांति में हृदय निमग्नता से भर जाता है उनके शीतल स्पर्श से हमारा हर रोम जागृतता से भर जाता है
सरलता और सेवा को प्रकट करती उनकी लहरों को अनुभूत करता है हृदय स्वयं के अस्तित्व से ही बेखबर हो
ममत्वता का दर पाता है और समर्पण से झुकता हमारा हर अस्तित्व उनके आशीर्वाद का पहर पाता है।।
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