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माँ ने हर दुःख झेला हैं

माँ
माँ ने हर दुख को झेला है।
हमें दुनिया में लाने के लिए उसने खुद अपने जीवन से खेला है।
माँ ने हर दुख ़़़़़़़
माँ से बडा न दुनिया में कोई
इसको तो खुद ईशवर ने भेजा है।
माँ ने हर दुख ़़़़़़़़
इसने पूरी दुनिया हार कर सिफ्र मुझको जीता है।
इसलिए सुरग का द्ध।र परमात्मा ने माँ के चरणों में
ही खोला है।
माँ ने़़़़़़
उसके लिए तो बस मैं ही मैं हूँ।
कठनाईयों मै न उसने मुझे छोडा कभी अकेला है।
माँ ने हर दुःख ़़़़़़़
अपनी ईचछाओं को तयाग कर उसने मेरी सभी जिद़ को किया पूरा है।
फिर भी उसने कुछ नही बोला है।मुझसे अच्छा नहीं है
कोई दुनियाँ मे उसके लिए।
मेरी छोटी छोटी सफलता पर
उसने पूरे घर में लगाया मेला है।
माँ ने हर दुःख ़़़़़़़़़
जिसके सर पर नहीं है साया बाप का बाप बनकर भी उसने अपने बच्चों को पाला अकेला है।
माँ ने हर दुःख ़़़़़़
उसकी ममता और पालना न मिलेगी दुनिया में कहीं
उस पर न्योछावर तो मेरा जीवन पूरा है।
माँ ने हर दुःख को झेला है ़़़़़़
कवियत्री।
आकृती वमा
©381989