माना कि मुनाफा नहीं इस कारोबार में है
मगर सुकून-ए-दिल फकत प्यार में है।
कोई जल्दबाजी नहीं रखियो पाने के लिए
लुत्फ़-ओ-मजा तो बस इंतजार में हैं।
इश्क़ का एहसास ऐसा एहसास है कि
कहां फिज़ा के मौसम-ए-बहार में है।
मुझे अब हर बार तेरे हाथों हारना है मंजूर
अगर तेरी जित मेरी हार में है।
जिंदगी भर बोसा-ए-जबीं के लिए तरस गया
भरोसा बस मुलाकात-ए-बार बार में है।
क्या हुआ गर खुशी नहीं मेरे बस में
अनुराग मरना तो इख्तियार में है।
©anuragrahi
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