बचपन में जब उनके बारे मे पढ़ा करते थे , तो किताबो में लिखी दो अक्षर की उनकी पहचान याद किया करते थे......
कोई पूछता था उनके बारे में तो वही दो अक्षर का जवाब देकर नवाब बन जाया करते थे.....
पर जब हर जगह लोग उनका जिक्र किया करते थे तो मन में वो दो शब्द गहरा जाल बुना करते थे....
फिर उस जाल से हम खुद को उनसे रूबरू कराया करते थे.......
जो बच्चों की खुशियों में अपना फ़र्ज़ निभाया करते थे, और खुद को खुद से बेहतर बनाया करते थे.....
उनके चेहरे की मुस्कान उन अनुभवो को बया करती थी जब वो अपना ज्ञान उन मासूम बच्चों को सिखाया करते थे.....
जो सरलता से मिट्टी से जुड़कर अपने पोधै रूपी मन को सादगी से सीचाँ करते थे.....
जो रंगो को अपने कपड़ो में न भरकर अपने विचारो मे भरा करते थे.....
जो ज़मींन से जुड़ कर ऊँचाईयो की उड़ान भरा करते थे...
पर अभी वो आसमान से जुड़े है और हम ज़मीन से उन्हें याद किया करते हैं..........
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