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मैखाना

टूटे दिलों के साथ लोग जाते हैं मैखाने में,
नशे के साथ दर्द भी घुल जाता है पैमाने में,
टकराते हैं जब जाम से जाम तो होता है,
कुछ ऐसा, अनजान की बेगानी भी लगती है,
अपने से ही जाते है मैखाने में ,
टूटे दिलों के साथ लोग जाते हैं मैखाने में ,
छलकते है आंखों से अंसु लबों पे
मुस्कुराहट रहती है महफ़िल में भी
न जाने अजीब सी तन्हाई रहती है ,
अपना गम भुलाने के लिए लोग पीते हैं
दुनिया को नज़रअंदाज़ करने के लिए
दो पल जीने के लिए जाते हैं ,
यार दोस्त को छोड़ कर मसगुल हो जाते हैं
खुद को रिझाने में ,
टूटे दिलों के साथ लोग जाते हैं मैखाने में ।।।
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©kavyamir