मैं
न आज़मायश होंगी न नुमाईश होंगी
ज़िंदा हूँ मैं ज़िंदगी मेरी होंगी,
न हार होंगी न ललकार कोई
जीती हूँ मैं ताकत मेरी होंगी,
न डर कोई न खौफ होगा
निडर हूँ मैं बस बेपरवाह रहूंगी,
न बन्दिश कोई न जेल होगी
आज़ाद हूँ मैं जश्न करूंगी
न घृणा कोई न नफरत होगी
प्रेम हूँ मैं बस प्रेम रहूंगी,
न डिगा सकोगें न हटा सकोगें
अडिग हूँ मैं अटल रहूंगी,
न मिटू कभी मैं न मिटा सकोगें
अमिट हुँ मैं अमिट रहूंगी
न मौत होगी न जिस्म बदलेगा
शाश्वत हुँ मैं अमर बनूँगी।