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मैं अपने गुज़रे पुराने दिन को देखता हूं।

मैं अपने गुज़रे पुराने दिन को देखता हूं
जब तुझे लिखें पुराने ख़त को देखता हूं

किसे इल्ज़ाम दूं क़ासिद को या खुद को
जब रखे सिरहाने तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

न जाने अब प्यार है या तुझसे ख़लिश मगर
हर रोज़ किसी बहाने तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

क्या करूं जाने क्यूं ख़फ़ा हो ख्वाब में भी नहीं आती
अब दिल को मनाने के लिए तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

मैं जानता हूं मुझे वहम है कि तुझे मुझसे प्यार है
मैं खुद को भुलाने के लिए तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

तुम्हें शायद लगता होगा कि मैं बेवफा निकला
मैं वफ़ा निभाने के लिए तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

जि चाहता है कि मैं खुद तेरे घर तुझे ख़त दें आऊंहिम्मत जुटाने के लिए हर रोज़ तुझे लिखें ख़त को देखता हूं

©anuragrahi