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मैं और तू......

तू दूआ है तेरी आस मैं....
बाकी है हवा तेरी सांस मैं...
बन के अजनबी रह लिए अब बनू
तेरा खास मैं...
तू चोट हैं तेरा दर्द मैं...
तू धुआँ हैं तेरा गर्द मैं...
तू ऒंस बन के गिर रहा......
जो चल रहा वो सर्द मैं...
तू नज़र है तेरा रंग मै....
तू जि़दगी तेरा ढंग मैं....
तू बन नशा.....
.....
और मलंग मैं...
तू साथ है तो लाख मैं...
तू नहीं तो खाख मैं...
तू चांद है मैं नूर हू
तू मिट्टी तो राख मैं...
तू खुदा है तो खुदाई मैं...
तू इश्क़ है तो जुदाई मैं...
तू रूह मेरे जिस्म कि...
तो तेरी
रूहाई मैं.......
तू रास्ता तेरा मुकाम मैं....
तू जा़त हैं और नाम मैं...
तू बन के रौनक बिखर रहा...
...............
.............
........
और तेरी शाम मैं..
तू अशक है तेरा गम मैं.....
तू रहम दिल तेरा रहम मैं.....
तू लिखने वाला अक्षत बन.....
बनू तेरी कलम मैं......
©akkshat28