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मैं भी अब जिंदगी मे तन्हा नहीं हूं।

मैं भी अब जिंदगी में तन्हा नहीं हूं
हजारों ग़म है साथ मैं तन्हा नहीं हूं।
कभी किसी को खोने का तो कभी पाने का
चले आ रहे है मेरे साथ मैं तन्हा नहीं हूं।
चलें गए उन्हें याद बनाकर,है उन्हें आह बनाकर
दिल में जतन कर रखा हुं मैं तन्हा नहीं हूं।
मिलने की ख्वाहिश में खुदकुशी को जी करता है
अब किससे मिलोगे दिल कहता है मैं तन्हा नहीं हूं।
जमजम नसिब हों उन बेवफाओं को ही अब
मटके में है कुंए का पानी मैं तन्हा नहीं हूं।
सखावत न दिखा अनुराग के साथ अब इतना
कमज़र्फ ही सही जिंदगी तो है मैं तन्हा नहीं हूं।
©anuragrahi