मैं भुवन का एक बंजारा वो महल की राजकुमारी
संशय है होगी फिर कैसे अब मेल हमारी।
मेरा जीवन ढला दुखों में
नंगे तन उमर गुजारे
उन्की सेज हैं हीरे मोतियों की
नीत परीयां है उन्हे संवारे
सबके आंखों की वो है दुलारी
मैं भुवन का एक बंजारा वो महल की राजकुमारी।
मैंने आकर आंसूओं की उम्र बढाई
वो जन्मी तो फुलों ने ली खुब अंगड़ाई
ये जग सारा मुझमें नुक्स निकाला
कहे कोई वहशी कोई आवारा
उन्की जबीं पर है जड़े सितारे
हर कोई है बस उन्हें निहारें
उनसे रौनक है आंगन उनकी उजियारी
मैं भुवन का एक बंजारा वो महल की राजकुमारी।
अगर पाक है प्रेम हमारा,मिलन की राह दिखा दे
मेरे महबूब से मेरे खत का उत्तर भिजवा दे
दिल की इस विरान बगिया में
सतरंगी अब फुल खिला दे
जो मेरे मनमीत को लागे न्यारी
मैं भुवन का एक बंजारा वो महल की राजकुमारी।
©anuragrahi
S