मैं चुप रहूं या ना रहूं,
कुछ बोलूं या ना बोलूं,
अपनी आवाज उठाऊँ या ना उठाऊँ,
सब सहन करूं या फिर ना करूं,
करती रहती हूं बस यही सवाल,
ढूंढती रहती हूं इनके जवाब,
मैं विरोध करूं या ना करूं,
मैं चुप रहूं या ना रहूं,
चुप रहूं तो डर है कि मुझे कमजोर ना समझे,
बोलूं तो मुझे गलत ना समझें,
मैं अपनों से लडूँ या ना लडूँ,
मैं चुप रहूं या ना रहूं,
दोष मेरा नहीं किसी और का था,
फिर भी इल्जाम मेरे ही सर पे था,
मैं खुद को गलत मानूं या ना मानूं,
मैं चुप रहूं या ना रहूं,
वो बुरा भला कहते रहे,
मेरा अपमान करते गये,
मैं शांत रहूं या ना रहूं,
मैं चुप रहूं या ना रहूं,
....Kanak Maheshwari
©kanak.art
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