मैं किस्मत की लकीरों को तो बदल नहीं सकता
मगर तेरे बिना तो जिंदा रह भी नहीं सकता।
मुझे मालूम है कि तू किसी और के लिए बनी हो
इन आंखों से दुसरों के बाहों में कसता देख भी नहीं सकता।
मैने हमेशा तुम्हें नेक नियत से ही देखा और समझा है
अपनी खुशी को तेरी खुशी की कुर्बानी ले भी नहीं सकता।
एक वक्त था जब हम दोनों गिले-शिकवे साझा करते थे
अब वक्त है कि मैं वो हिमाकत कर भी नहीं सकता।
मेरे मरने के बाद तुम जनाजे पर दो चार आंसू बहा देना
इस से ज्यादा की गुजारिश तो तुमसे कर भी नहीं सकता।
©anuragrahi
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