V

मैं क्या लिखता?

मैंने छोड़ दिया था लिखना
शायद मैं पढ़ रहा था चेहरा किसी का
और उस चेहरे पे बहुत बातें थीं
जो मैं नहीं जानता था
और मेरे अंदर लिखी जाती थी
रोज़ एक नयी कहानी
और सूरज की हर एक किरण के साथ
मेरी सुबह मे तुम आती थी ।
और एक दिन यूँ ही बैठे हुए मैंने सोचा
की इस कहानी का क्या अंत है
फिर एक दिन तुम मेरे पास आयी
मेरी कविताओं के साथ
और तुमने कहा
शायद तुम अच्छी कविता नहीं लिखते
और मैं तुम्हारी आँखों मे देख रहा था
और मैंने खुद से कहा
तुम्हें पता नहीं की
मैंने हर रोज़ तुम्हें ही लिखा है
और तुमसे अच्छी कविता
मैं क्या लिखता ।
🌹🌹🌹
©vikasgarg