मैं मज़े में हूँ!
न किसी की नज़र का बोझ, न किसी की बात का ज़हर,
मैं अपनी ही धुन में हूँ, अपने मज़े में हूँ।
न किसी की तालियों की भूख, न किसी के तानों का असर,
मैं अपनी ही राह में मगन, अपने मज़े में हूँ।
न किसी शख्स से मोहब्बत, न इस तन्हाई से डर,
मैं अपने भरोसे का मुसाफिर, अपने मज़े में हूँ।
न किसी हार का ही दुःख, न किसी जीत की खबर,
मैं जैसा हूँ, उसी में मुकम्मल बस अपने मज़े में हूँ।
© Visha Saini
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