मैं पास हूं जितना उतना ही खुद से दूर हूं।
मैं पास हूं जितना उतना ही खुद से दूर हूं
इस बेजार जिंदगी में ख़ुशी का मुंतजिर हूं
शाम कोई ऐसा नहीं जो रूलाता नहीं
अपने रोने ही से तो आज़ मैं मशहूर हूं
कितना मासूम है ये आज़ शाम का पहर
आप है और साथ मैं हुजूर हूं
अपने दिल में मुझे भी थोड़ी सी जगह दे दो
रियासत-ए-ग़म से थका एक मैं दस्तूर हूं
दोज़क हो या जन्नत का सफर हो अनुराग
आंखें मूंद कर चलने में मैं मजबूर हूं।