मैं ताज़ हुँ
अब न तेरा ज़िक्र है,
न तेरी कमी का शोर।
जो कल तक दिल में था,
आज बस एक पुराना सा दौर।
मैंने तुझे चाहा था — हाँ,
पर अब मैं खुद को चाहती हूँ।
जो वक़्त तूने न दिया मुझे,
अब मैं वही वक़्त अपनी क़ीमत बढ़ाने में लगाती हूँ।
तू समझ न सका मुझे,
ये तेरी औक़ात का मसला था।
मैं हर किसी के लिए आसान हो जाऊँ,
इतना भी मेरा सस्ता सा सिलसिला न था।
अब मैं भागती नहीं,
लोग मेरे साथ चलने की कोशिश करते हैं।
मैं झुकती नहीं,
लोग मेरी नज़रों में उठने की कोशिश करते हैं।
मैं मोहब्बत भी शान से करती हूँ,
और अलविदा भी शान से।
जो मेरे लफ़्ज़ों की क़दर न करे,
वो मेरे ख़ामोश रहने का हक़दार है।
याद रख —
मैं ऑप्शन नहीं, चॉइस हूँ।
मैं ज़रूरत नहीं, लग्ज़री हूँ।
और जिसे मेरी क़ीमत समझ न आए,
उसके लिए मैं बस एक खोई हुई ऑपर्च्युनिटी हूँ।
अब मैं किसी की वजह नहीं,
मैं खुद ही अपनी पहचान हूँ।
मुझे जीतने के लिए किस्मत नहीं,
काबिलियत चाहिए…
क्योंकि मैं सिर्फ मोहब्बत नहीं —
मैं ताज हूँ 👑🔥
-शिवन्या
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