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मैं, वो और पतंग

सुना है पतंग के बड़े शौकीन हो तुम
उस पतंग सा ही बना लो मुझे
जीसमें डोर भी तुम्हें ही बांधनी हो
जिसकी डोर भी तुम्हें ही थामनी हो
जिसे उड़ाओ सबसे ऊपर और मशहूर करदो
मगर इतना भी ऊपर नहीं की खुद से दूर दो
के जिसको "मेरी है" कह कर किसी को छूने भी ना दो
जिसपर हक जताकर जिसे किसी का होने ही ना दो
जिसे खोने का डर हर पल ही तुम्हारे मन में हो
पर कभी तो दूर होना है ये बात भी तुम्हारे ज़हन में हो

- written by priya
©zazbaat