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मैं ये झुठ बोलता हूं कि मैं तुम्हें भुल जाउंगा।

मैं ये झुठ बोलता हूं कि मैं तुम्हें भुल जाउंगा।

मैं ये बार बार कहता हूं मैं तुम्हें भुल जाउंगा

मैं ये झुठ बोलता हूं कि मैं आज से तुम्हें भुल जाउंगा

कभी तुझसे गुस्सा के कभी खुद से झुंझला के

हर बार कहता हूं कि मैं आज़ से तुम्हें भुल जाउंगा

शायद तुम उब गई होगी या तुम्हें फर्क नहीं पड़ता हो

सोंचती होगी फिर कहेगा मैं आज़ से तुम्हें भुल जाउंगा

तुम्ही बताओ क्या मुझे हक़ नहीं तुम्हें प्यार करने का

अगर नहीं है तो कह दो,मैं आज़ से तुम्हें भुल जाउंगा

कुछ दिन ख़ामोश रहा फिर किसी बहाने तबियत पुछ लिया

क्या तुम्हें लगता है मैं आज से तुम्हें भुल जाउंगा

तुने तो कभी नहीं कहा मैं नये साल मुबारकबाद देता हूं

तुम खुश रहो मुझे भुल कर मैं भी आज़ से तुम्हें भुल जाउंगा।