मैंने कहा वो अजनबी हैं,
दिल ने कहा ये लगी हैं,
मैंने कहा वो दूजी हैं,
दिल ने कहा फिर भी अपनी हैं,
मैंने कहा वो दो पल की मुलाकात हैं,
दिल ने कहा जो दो पल में पूरी जिन्दगी जी ले,
उसी में बात हैं,
मैंने कहा वो मेरी भूल हैं,
दिल ने कहा फिर भी कबुल हैं,
मैंने कहा वो मेरी हार हैं,
दिल ने कहा यही तो प्यार हैं.
मै पथिक तो वो थी पीपल की छाया,
मैं प्यासा तो, वो तृप्त करती मेरी काया,
तजते नहीं तजता उसकी मोह-माया
क्या करूँ अब तू ही बता
एक वो ही तो है जिसके सिवा न कोई दूजा भाया
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©vikasgarg
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