मौका मिला है खुद को समझाने का
परखने का और अपनों संग बिताने का
तुम हीं तो कहते थे कभी फुर्सत नहीं मिलती
आज दे दी रब ने लम्हें अपनों के काम आने का
जंग लग ग्ई जिस चीज में कोने में पडी घर के
आज मौका मिला है उसे फिर से चमकाने का
घर संभालना कोई आसान नहीं होता है काम
आज देख लिया है आँखों ने कहा बडे पुराने का
बेशक तुम्हें वो न मिले जो मिलता था घर से दूर
बुरी आदतें थी सब..समय है पीछा उनसे छुडाने का
खुदा भी कर रहा उथल पुथल मर्जी से 'अभय'
क्या पता ये भी खेल हो उसके किसी नजराने का
©abhidilse
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