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मौन

आज धूप कुछ ज्यादा चंचल लगती है
आज हवा भी लहराती सी चलती है
आज तो दीवारों के भी हैं कान खड़े
आज तो दरवाजे भी लगते बड़े बड़े
आज अगरबत्ती जलती इठलाती है
घर की सारी फिज़ां ही वाद्य बजाती है
रोज डरा सहमा सा मौसम नाच रहा
आज तो सब कुछ बदला बदला लगता है
सुस्ती अलसाई सी भाग गई है आज
मंदिर में ललितामाई जाग गई है आज
घर खाली था रोज आज है भरा-भरा
ओहो ! मैने आज एक दिन मौन धरा
"उमाशंकर"