M

" मौसम की नजाकत "

मौसम की नजाकत को महसूस कर..
तू खुद को उसमें मशगूल कर..
जहां की गंभीरता को भूल कर..
उस के एहसास में घुल कर,
तू खुद को कोमल शूल कर..
हर एक गिरती बूंद पर,
तू खुद को मिट्टी की धूल कर..
अपने भीतर के मूल पर ,
हवाओं के संग झूम कर
तू हर जर्रा महसूस कर..
आभास के झूले पर झूल कर ,
तु ईश्वर के इस तोहफे को ,
भीतर से कुबूल कर
तू भीतर से कुबूल कर..
©myemotions