मेरा उससे जूझने का कोई इरादा ना था,
किस मोड़ पर मिलेंगे, किया मैंने वादा ना था,
पता नहीं कब वो वह मेरा रास्ता रोककर खड़ी हो जाएगी,
सामने आएगी वो, तो जिंदगी से बड़ी हो जाएगी,
दो पल की ही तो है, मौत की उम्र ही कितनी है?
लगता है जिंदगी का सिलसिला,
बस कल, आज कल जितनी है,
चोरी छिपे पीछे से दबे पांव ना आना,
सामने से वार करके मुझको अजमाना,
प्यार मुझको अपने परायो का इतना मिला,
ना तो पराए से, ना ही अपनों का कोई गिला,
मेरी नैया तो भाव भंवरों की मेहमान है,
नैया को पार लगाने वाला "महाकाल" भगवान है
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©vicky
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