सड़क पर चला जा रहा था,
गीत खुशी के गा रहा था,
रास्ते में शुक्ला जी मिल गये,
चेहरा उनका देख के हम हिल गये,
खिले गुलाब की तरह चेहरा उनका खिलता था,
शुक्ला जी हर किसी से हस कर मिलता था,
हमने पूछा:
क्या हुआ, मुरझाये से नज़र आते हो,
लगता है कुत्ते के खाए नजर आते हो,
शुक्ला जी बोले:क्या बताए गुप्ता जी,
हमारी तो आजकल हालत ही खराब है,
लोगों की मदद करना हमारा ख्वाब है,
पांच दिन पहले हमने अखबार में नेता की फोटो देखी,
तभी हमने भी किसी की मदद करने की सोची,
पांच दिन से सड़क पर भटक रहे हैं,
पर हमारी तो किस्मत ही बेकार है,
ना तो किसी truck ने accident किया,
ना किसी के ऊपर से गुजरी कार है,
हम ये सुनने को तरस रहे हैं,
शुक्ला जी सच्चे मददगार है,
शुक्ला जी आगे बोले:
गुप्ता जी, हम तो दूसरों की मदद करने निकले थे,
आज हम खुद ढूंढ रहे हैं कि
कोई तो मदद कर दो,
इस मददगार की
विकास गर्ग
©vicky
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