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मधुशाला की पसंदीदा पंक्तिया

किस उलझन से क्षुब्ध आज
निश्चय ये तुमने कर डाला ।
घर चौखट को छोड त्याग
चढ़ बेठी तुम चोथा माला ।
अभी समय हैं जीवन सुरभित
पान करो इसका बाला ।
ऐसे कूदकर मरने पर तो नही मिलेगी मधुशाला ।
©ckprajapat