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मए इंतेहा वही.....!!

मैं अक्स वहीं,
जिसकी पहचान हो तुम,...
मैं इश्क वहीं,
जिसकी इबाबत हो तुम,...
मैं सफर वहीं,
जिसकी मंजिल हो तुम,...
मैं इंतहा वहीं,
ज़िसमें बेइंतहा हो तुम.....
©rohittiwar