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मेरा गाँव

गाँव की मिट्टी मे,
आज भी है वही खुशबू।
शहरो के लोग जिस्से ,
रह जाते महरूम ।।
टिलो में बढ़ो के गप -शप,
खेतो में बच्चों के खेल-कूद
पेड़ों में पक्षियों के चहचहाहट।
घाटो में काकियों के छप-छप।
शहरो में कहाँ मीलते ये सब।
यहाँ शुख-दुख में सब देते साथ,
शहरो में तो बस छोड़ जाते साथ।
गाँव की परम्पराएं आज भी,
सुनाती अपनी गौरव -गाथाए।
जिस्से भारत की खूबसूरती हैं झलकते।
इसलिए गाँव में ही सब मुक्ति पाए।
_Labze_dil
©ankitsaha