समंदर से भी गहरा और फिजाओं से भी तेज है मेरा मन,
हवाओं से ज्यादा चंचल,
पल में छू लेता आसमान मेरा मन,
पल में जमीन पर लौट आता,
कभी जागता कभी सो जाता मेरा मन,
कभी खोया सा रहता तो,
कभी खुशी संग झूम उतने लगता मेरा मन,
कभी तो यह प्यार के गीत गुनगुनाता,
कभी चुटकुलों से संवर जाता,
कभी सुख दुख के आंसू बहाता,
कभी महकती सुबह सा रोशन हो जाता,
मन तो मन है मन पर चलता किसका जोर है,
तभी कुछ ना मांगे कभी कुछ मांगे MORE है,
कभी-कभी इसमें झांको प्यारे !
मन की बातें मन हीं जाने,
कभी तो सुलझेंगे उलझन सारे,
मन के सहारे चलते जमाने |
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©vicky
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