रंग बिरंगी दुनिया का नज़ारा करना
मेरे पहले लफ्ज़ पे तुम्हारा इशारा करना
खुशियां जैसे सातवें आसमां से ज़मीं पे आयीं
मेरे बोलने का फिर इंतजार सबको दोबारा करना
बोलने को कहा किसी ने पापा तो, किसी ने दादा
पहले लफ्ज़ में अम्मा कहा तो तुमने कहा नहीं पापा कहना
मेरे पहले लफ्ज़ की गुरु, जो सीखा मैंने तुम्हीं से है "मां"
देखा हर मौसम की मार को मेरे से पहले तुम्हारा सहना
कोई बराबरी करे तो कैसे कर सकता है भला
सब यहीं रह जायेगा पर
तेरी दुआओं का साथ दोनों जहां में है साथ रहना
©zulqarnain
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