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मेरा सफर 2

लड़ लड़ कर मर जाऊंगा बेशक ,
हारना तो मैंने सीखा ही नहीं ।
चुनौतियां कितनी बड़ी क्यो न हो ,
कोई फर्क नहीं पड़ता ।
मंजिलें कितनी दूर क्यों ना हो ,
मुझे बिल्कुल परवाह नहीं ।
चलता रहूंगा अपनी डगर पर ,
सभी बाधाओं को दूर किए ।
पहुंचना तो होगा एक दिन मुझे ,
चल जो रहा हूं दिल में आग लिए ।
ना थकान मुझे थका सकती है ,
ना परिस्थितियां मुझे हिला सकती है ।
इसी जज्बे से चलता रहूंगा बस ,
पहुंच जाऊंगा अपनी मंजिल तक ।
पर दुख होगा मुझे मंजिल पर पहुंचकर ,
इस सफर में ना जाने कितने अपने रूठ चुके होंगे
,कितने छुट चुके होंगे ।
आऊंगा लौटकर एक दिन उन सब के बीच ,
इस दुनिया के बीच ।
उनका दर्द अपना बनाने ।
उनके जीवन को आसान बनाने ।
यही सबसे बड़ी ख्वाहिश है ।
जिस दिन मैं ऐसा कर पाया ,
उस दिन खुद को पूरा मानूंगा ।
लोगों के चेहरे का मुस्कान देखकर ,
न जाने में इतना खुश क्यो हो जाता हूं ।
जिंदा रहना चाहता हूं सबके दिलों में ।
वहीं अपना आशियाना बनाना चाहता ।
Ashwani(Addy) wrote
©addy